HomeFamily Sex Storiesरिश्ते की बहन की चुत और गांड चुदाई

रिश्ते की बहन की चुत और गांड चुदाई

मेरी दूर की बहन घर आई, उसको कुछ पैसों की जरूरत थी. मैंने दे दिए. मैं पैसे वापिस लेने गया तो खाना बना रही थी. पसीने से भरी उसकी गोरी चूचियां मुझे ललचाने लगी.
हैलो फ्रैंड्स, मेरा नाम जय है. मैं 28 वर्ष का एक मारवाड़ी युवक हूँ. मैं राजस्थान जोधपुर से हूँ. मेरी हाइट 5 फुट 9 इंच है और मेरे लंड की साइज साढ़े सात इंच है.
अन्तर्वासना पर ये मेरी पहली कहानी है. वैसे मैं सेक्स के मामले में बहुत आगे हूँ. अब तक मैंने बहुत सी लड़कियों और आंटियों को बिस्तर पर चुदाई का सुख दिया है.
वो मेरी दूर की बहन लगती है तो उसका मेरे परिवार में आना जाना रहता था. मैंने पहले कभी उसको चोदने की नज़र से नहीं देखा था.
पर एक दिन अचानक वो मेरे घर आई, उसको कुछ पैसों की जरूरत थी. मैंने उसको पैसे दे दिए.
उसने कहा- मैं दो-चार दिन में वापस कर दूंगी.
मैंने कहा- ठीक है … कोई बात नहीं.
दो या तीन दिन बाद मुझे रात की ड्रिंक के लिए पैसे की जरूरत थी, तो मैंने इधर उधर कोशिश की. फिर मुझे याद आया कि मैंने अपनी बहन को दिए थे, उससे पैसे वापस ले लेता हूँ, तो मेरा काम बन जाएगा.
मैंने उसको कॉल किया.
वो बोली- ओके घर आकर ले जाओ … पर अभी आधे ही हैं.
मैंने कहा- कोई बात नहीं, इतने में मेरा काम हो जाएगा.
मैं उसके घर गया, तो देखा वो सब्जी रोटी बना रही थी और थोड़ी परेशान लग रही थी.
मैंने उससे ऐसे ही पूछ लिया- क्या हुआ … कुछ परेशान लग रही हो?
वो बोली- तेरे जीजा चार पांच दिन घर नहीं आएंगे … और मुझे अकेले रहने में थोड़ा डर लगता है.
वैसे उसके एक लड़का और एक लड़की है. वो दोनों दस बारह साल के हैं. फिर भी अकेली औरत तो अकेली ही होती है. वो गैस के पास बैठी बैठी गर्मी से पसीने से लथपथ हो गई थी.
तभी मेरी नज़र उसकी चूचियों पर गई. पहली बार मेरे मन में उसके लिए कामुक ख्याल आया था. मैंने ध्यान से देखा तो उसकी साइज़ बड़ी मस्त थो. उसके नैन नक्श देख कर वैसे तो हर कोई पागल हो सकता था. बस मैं भी फिसल गया.
तभी उसने मुझे अपने मम्मों को घूरते हुए देख लिया. उससे नजर मिलते ही मैंने अपना सर दूसरी तरफ कर लिया.
उससे कुछ देर बात करने के बाद मैंने कहा- मैं चलता हूँ, मुझे पैसे दे दो, आठ बजने वाले हैं.
वो बोली- पैसे किस लिए चाहिए?
मैं उससे बिंदास बोल दिया- आज ड्रिंक करने का मूड है, इसलिए.
उसने मुस्कुराते हुए पैसे दिए और बोली- किस जगह पर बैठ कर पियोगे?
मैंने कहा- कहीं बाहर ही बैठ कर पी लूंगा.
उसने कहा कि बाहर कोई देखेगा, तो अच्छा नहीं लगेगा. तुम मेरे घर आकर पी लेना और यहीं खाना भी खा लेना.
मैंने उसे देखते हुए कहा- ठीक है कोई बात नहीं. तुम क्या लोगी?
उसने बच्चों के लिए आइसक्रीम लाने की कह दी.
मैंने बहन से पैसे लिए और दुकान से मेरे लिए दारू और उसके बच्चों के लिए आइसक्रीम ले आया.
बच्चों ने खाना खा लिया था. वो बच्चों के साथ दूसरे कमरे में आइसक्रीम खाने लगी.
मैंने बाहर ड्राइंगरूम में बैठ कर अपना पैग बनाया और ड्रिंक करना चालू कर दी. मैं धीरे धीरे ड्रिंक कर रहा था.
तभी मैंने सुना कि बहन ने अपने बच्चों को बोला कि अब तुम दोनों सो जाओ, मैं और मामा दोनों साथ खा लेंगे.
बच्चे सोने चले गए और वो नहाने चली गई. मैं बाहर के कमरे में बैठ कर ड्रिंक का आनन्द ले रहा था.
मुझे थोड़ा सुरूर होने लगा था. लंड बेताब होने लगा था और कुछ देर पहले उसकी पसीने से भीगी चूचियां मेरे लंड को खड़ा करने लगी थीं. मैंने सोचा कि बहन को नहाते हुए देख लिया जाए.
बस मैं बाथरूम के पास जाकर उसको नहाते हुए देखने की कोशिश करने लगा. बाथरूम के गेट के ऊपर की जाली से मैंने मुश्किल से दो या तीन सेकेंड उसे देखा होगा कि उसकी नज़र मेरे पर पड़ गई. उससे नजरें मिलते ही मेरी तो समझो जान ही आफत में आ गई.
मैं सीधा रूम में आकर पैग खत्म करके बिना उसको बताए उसके घर से निकल गया. बोतल में जो बची हुई दारू थी वो बोतल मैंने उठा ली और बाहर सड़क पर आकर घूमने लगा.
तभी उसका कॉल आया- खाना क्यों नहीं खा कर गए … और बिना बोले क्यों चले गए?
मैंने सोचा कि ये घर बुला कर मुझे पक्का कुछ सुनाएगी.
मैंने सोचा, जो होगा देखा जाएगा. मैंने उससे कहा- मैं जरा सिगरेट लेने चला गया था, अभी आता हूँ.
फिर मैंने पान की दुकान से एक सिगरेट का पैकेट लिया और उसके घर आ गया.
वो नार्मल से कपड़े पहने हुए थी. उसने गेट खोला. मैंने बोला कि मुझे जल्दी है, तुम जल्दी से खाना दे दो, मुझे घर जाना है.
उसने मुस्कुराते हुए मुझे देखा और हम दोनों के लिए एक ही थाली में खाना लगा कर रूम में ले आई.
हम दोनों खाना खाने लगे.
खाना खाते समय उसने मुझे आखिर पूछ ही लिया- तुम मुझे बाथरूम में क्यों देख रहे थे?
मैंने बोल दिया- बस ऐसे ही.
उसने कुछ नाराजगी दिखाई और खाना नहीं खाने का बोल कर अपने रूम में चली गई. मुझे भी अच्छा नहीं लगा, तो मैं उसके पीछे चला गया. वो अपने रूम में रो रही थी. मैंने उसका हाथ पकड़ कर उसको अपनी कसम दिला कर खाना खाने का बोला.
वो मेरी तरफ देखने लगी, तो मैं उसका हाथ पकड़ कर वापस लेकर आ गया. वो मेरे साथ साथ बेमन से आ रही थी. बाहर आकर उसने मेरे साथ कुछ खाना खाया.
फिर मैं बोला कि ठीक है, मैं अब चलता हूँ.
वो मेरी तरफ देख कर बोली- आज यहीं रूक जाओ न!
मैंने कहा- घर पर क्या बोलूंगा?
उसने कुछ सोचते हुए घर पर फोन कर देने का कहा.
मैंने पापा को कॉल कर दिया कि दोस्त के घर काम है, मैं रात को उसी के घर रूकूंगा.
पापा से मुझे परमिशन मिल गई.
मैंने उससे बोला- ओके, मैं बाहर रूम में सो जाता हूँ, तुम बच्चों के पास सो जाओ.
वो बोली- ठीक है जब मुझे नींद आएगी, तब चली जाऊंगी.
मैंने उसे देखते हुए कहा- ठीक है.
मैंने सिगरेट जला ली. वो मुझे सिगरेट पीते हुए देखने लगी.
उसके साथ कुछ देर इधर उधर की बातों के बाद उसने वही बात फिर से मुझसे पूछ ली.
मैंने भी बोल दिया कि बस ऐसे ही देख रहा था.
मैं ऐसा बोल कर चुप हो गया. वो भी चुप हो गई.
मैंने उसकी तरफ देखा, तो उसके चेहरे पर हलकी मुस्कान सी दिखी.
मैंने पूछ लिया- क्या हुआ हंस क्यों रही हो?
उसने बोला- कुछ नहीं, मैं तो बस यूं ही हंस रही थी.
मैं उससे बोला कि अब तुम सो जाओ.
उसने बोला- मुझे नींद नहीं आ रही है … तुम सो जाओ.
मैं लेट गया. उसने मेरे सर पर हाथ रखा और बोला कि अब कभी ऐसा मत करना.
मैंने बोला- ओके ठीक है.
वो मेरे सर को सहलाती रही.
फिर मैंने बोला- तुम बहुत सुन्दर हो, मैं तुम्हें देखना चाहता था, इसलिए मेरा मन करने लगा था.
वो बोली- तो वो बोली कि बाथरूम में से क्या देख रहे थे, मैं तो बाहर भी दिख जाती हूँ.
मैं समझ गया कि इसके मन में भी कुछ चल रहा है. मैंने हिम्मत करते हुए उससे कह दिया- तुम आज एक बार अपने मम्मे दिखा दो, फिर कभी नहीं बोलूंगा.
मेरी इस बात से वो थोड़ा नाराज हो गई और मेरी तरफ आंखें तरेर कर देखने लगी.
मैंने कहा- ओके मत दिखाओ, मैं अब कभी तुम्हारे घर नहीं आऊंगा.
उसने बोला- यार वो बात नहीं है, यदि किसी को ये बात पता चल गई, तो क्या होगा.
मैंने उसकी इच्छा जान ली और बातों में लगा कर उसे मना लिया. उसने ऊपर के ब्लाउज के हुक खोल कर थोड़ा सा सीन दिखाया.
मैंने बोला- पूरा दिखाओ न!
कुछ देर नानुकर के बाद मेरी बहन ने अपना पूरा ब्लॉउज खोल दिया. मैंने उससे ब्रा भी खोलने का कहा, तो उसने मना कर दिया.
मैंने उसे पटाते हुए ब्रा ऊपर करने का बोला कि अच्छा खोलो मत … ऊपर कर लो.
वो मान गई. उसके मस्त रसीले मम्मों को देख कर मेरा मन ख़राब हो गया. उसके गोल मटोल बड़े बड़े दूध बड़े मादक लग रहे थे. उसके मम्मों पर काले निप्पलों को देख कर मेरा लंड खड़ा हो गया.
मैंने उससे पूछा- हाथ लगा लूं?
वो हंस कर बोली- नहीं यार.
फिर भी मैंने धीरे से उसके एक दूध को हाथ से पकड़ कर दबा दिया.
उसने झट से अपना चेहरा दूसरी तरफ घुमा लिया. मैंने उसकी मर्जी समझते हुए धीरे धीरे उसके दोनों मम्मों को सहलाना शुरू कर दिया.
अब उसकी धड़कन और मेरी धड़कन बढ़ने लगीं. मैंने धीरे से एक मम्मे के निप्पल पर अपने होंठ रख दिए और चूसने लगा. उसने कुछ देर के लिए तो मना किया, फिर उसने कुछ नहीं बोला.
मैंने अपनी बहन के दूध चूसते हुए उसकी कमर पैरों पर अपना हाथ चलाना चालू कर दिया. जिससे उसने पहले मेरे चेहरे को ऊपर करके देखा और फिर मेरे होंठों पर अपने होंठ रख दिए. मैंने भी होंठ चूसना चालू कर दिए.
अब रूम का माहौल कुछ गर्म हो गया था. मैंने धीरे धीरे हाथ को उसके पैरों के बीच में घुमाना चालू कर दिया और उसकी चूत पर चड्डी के ऊपर से सहलाना चालू कर दिया. बहन की चुत के पास बहुत ही गीलापन लग रहा था. वो चुदासी सी होने लगी थी.
मैंने उसे अपनी बांहों में खींच लिया. वो मेरे पूरे जोश में आ गयी थी. मैं हाथ नीचे ले जाकर उसकी चूत के दाने को उंगली से कुरेदने लगा, जिससे उसकी आंखें मस्ती से बंद होने लगीं.
कुछ देर बाद मैंने उससे कहा- मुझे नीचे चुत पर किस करना है.
पहले तो उसने मना किया, फिर बोली- मेरे मना करने पर तुमको मानना है नहीं … तुमको जो करना है, कर लो.
मैंने कपड़े ऊपर करके उसकी चड्डी को निकाला और अपनी जुबान से उसके चूत के दाने को चाट लिया. उसकी मादक कराह निकल गई. मैं उसकी पूरी चूत को जुबान से चाटने लगा, उससे उसके मुँह से मादक सिसकारियां निकलने लगीं.
अब तो वो खुद मेरे सर को अपनी चूत पर अपने दोनों हाथों से दबाने लगी. मैं जोर जोर से चुत की फांकों में जीभ चलाने लगा.
फिर अचानक उसने मेरे मुँह पर अपना पानी छोड़ दिया और एकदम निढाल हो गई.
मैंने फिर से गर्म करने के लिए उसके होंठों और मम्मों पर किस करना स्टार्ट किया, जिससे वो मुझे अपने ऊपर खींचने लगी.
मैंने अपनी पैंट उतार कर उसके हाथ से मेरा लंड सहलाने को बोला.
वो शर्माते हुए मेरे लंड पर हाथ लगाने लगी और बोली- तुम्हारा लंड बहुत अच्छा है.
मैंने बोला- तुम भी इसको चूसो न!
आप सबको पता है मारवाड़ी महिलाएं ये काम कम पसंद करती हैं. पर मैं भी जिद्दी हूँ. मेरे कुछ देर समझाने पर बहन मान गई.
मेरी बहन ने मेरे लंड को चूसना शुरू कर दिया. कुछ देर लंड चूसने के बाद उसने मना कर दिया.
मैंने उसको कुछ देर मसलने के बाद बोला- चलो अब वो काम करें, जिससे आग शांत हो जाती है.
वो शर्मा गई.
मैंने उससे बोला- तुम अपनी आंखें बंद कर लो.
उसने अपनी आंखें बंद कर लीं. उसके बाद मैंने अपना लंड उसको चुत पर सैट करके धीरे से पेल दिया. उसकी हल्की सी चीख निकल गई … मगर वो मेरे लंड को गड़प कर गई.
मैं धीरे अन्दर लंड चुत के बाहर करने लगा. उसकी सेक्सी सिसकारियां बढ़ने लगीं. मैंने उसके होंठों पर अपने होंठ रख दिए और अपनी स्पीड को थोड़ा बढ़ा दिया. मेरे झटकों से उसकी हालत ख़राब होने लगी.
पन्द्रह मिनट बाद उसने बोला- जरा रुको.
मैंने अपना लंड बाहर निकाल लिया और उसको किस करने लगा. मेरा लंड उसकी चूत उसके पानी से पूरी तरह गीला हो गया था. मैंने लंड को अपनी अंडरवियर से साफ़ किया और सीधा लेट गया. उसने मुझे लेटते देखा, तो वो मेरे खड़े लंड की तरफ लालसा से देखने लगी.
मैंने उससे ऊपर आने को बोला, तो वो मान गई. उसने मेरे ऊपर अपनी पोजीशन सैट की और मेरे लंड को पकड़ कर अपनी चुत में ले लिया. अब मैं नीचे से जोर जोर से झटके दे रहा था और वो अपनी गांड उछाल उछाल कर मज़े ले रही थी.
कुछ देर बाद उसका शरीर अकड़ने लगा, तो मैंने भी अपनी स्पीड बढ़ा दी. बस अगले कुछ ही पलों बाद हम दोनों एक के बाद एक धराशायी हो गए. मैंने उसको अपने ऊपर सीने से चिपका कर लिटा दिया.
हम दोनों बेहद थक गए थे. हमारी कब आंख लग गई, हमें कुछ पता ही नहीं चला.
शायद तीन या चार बजे मेरी आंख खुली तो वो मेरे पास नहीं थी. मैं उसको देखने के लिए उसके कमरे में गया, तो वो औंधी सो रही थी.
मैं उसके पास जाकर बैठ गया और उसकी कमर और गांड पर हाथ फेरने लगा.
उसने मेरे हाथ पकड़ लिए और बोली- जाओ, बाहर सो जाओ.
मैंने बोला- यार आज मौका है तो आ जाओ … नहीं तो फिर कब मिलन होगा.
उसने भी मस्ती के चक्कर में हां कर दी और बोला- तुम बाहर रूम में जाओ … मैं आती हूँ.
मैं बाहर आकर बैठ गया. मैंने फिर से दारू का पैग बना लिया था और सिगरेट सुलगा ली थी.
दस मिनट बाद वो मेरे पास आई और मेरे से लिपट कर रोने लगी.
मैंने पूछा तो बोली- सच में आज जो मज़ा आया है, वो जिंदगी में कभी नहीं आया.
मैंने कहा- अभी सुबह होना बाकी है मेरी जान … देखती जाओ क्या क्या होता है.
उसके बाद मैंने उससे दारू के लिए पूछा, तो उसने गिलास उठा कर एक ही झटके में पूरा खींच लिया और मेरे हाथ से सिगरेट लेकर मुँह का स्वाद ठीक करने लगी.
इसके बाद हम दोनों ने एक एक पैग और खींचा.
नशा का मजा हावी होने लगा था. हम दोनों लिपट गए. मैंने उसके होंठों, गर्दन और मम्मों पर किस की बौछार कर दी.
वो सिसकारने लगी और कपड़े खोल कर चित लेट गई.
मैंने उसकी चूत पर हाथ घुमाया, तो उसने गांड उठाते हुए कहा- जैसे रात में चाटी थी, वैसे चाटो.
उसको लिटा कर मैंने बहन की चूत पर अपनी जुबान का जादू चलाना शुरू कर दिया. वो चुदास से छटपटाने लगी, उसकी चूत से रसधार बहने लगी. जिसको मैंने चाट चाट कर साफ़ कर दिया.
बाद में मैंने उससे लंड चूसने के लिए बोला, तो इस बार वो रंडी की राजी हो गई थी. उसने एक झटके में मेरा लंड मुँह में ले लिया और चाटने लगी. मैं समुन्दर के गोते लगाने लगा.
कुछ देर बाद मैंने उसको घोड़ी बनने को बोला, तो वो झट से रेडी हो गई.
मैंने उसको पीछे से पकड़ कर उसकी चूत पर अपना लंड सैट कर दिया और बहन की चुत चुदाई करने लगा. लंड की रगड़ से वो और जोर जोर से सिसकारने लगी.
मैंने उसे चिल्लाने के लिए मना किया कि जोर जोर से शोर मत करो.
पर उसकी सिसकारियां बंद नहीं हुईं. कुछ देर बाद उसने बोला- मैं पहले की तरह ऊपर आउंगी.
मैं नीचे लेट गया और वो ऊपर आकर जोर जोर से गांड उछाल उछाल कर मज़े लेने लगी. मैं उसके मम्मों को जोर जोर से दबाने लगा, जिससे उसकी हालत और ख़राब हो गई. वो अकड़ कर मेरे लंड को अपने रस से गीला करने लगी.
मैंने उसको वापस घोड़ी बनने को बोला, तो घोड़ी बन गई. इस बार मैं काफी देर तक तो अपने लंड को उसकी चूत और गांड पर घुमाता रहा. वो कुलबुलाने लगी थी.
वो कहने लगी- लंड अन्दर करो ना!
मेरा उसकी गांड मारने का दिल कर रहा था तो मैंने बोला- थोड़ा पीछे करूं क्या?
पहले तो उसने मना कर दिया, बाद में मेरे कसम दिलाने पर मान गई. मैंने उठ कर किचन से जाकर घी लिया और वापस आकर उंगली से उसकी गांड और अपने लंड को चिकना कर दिया.
अब मैं बहन से बोला- थोड़ा दर्द होगा … पर बाद में मज़ा भी आएगा.
वो बोली- ठीक है … पर जब मैं बोलूं, तब रुक जाना.
मैंने हां कर दी और लंड को गांड पर सैट करके बोला- अब तुम गांड ढीली करो और धीरे धीरे पीछे को जोर लगाओ.
उसने ऐसा किया. इधर मैं भी बड़ी आहिस्ता से अपनी बहन की गांड में लंड डालने की कोशिश कर रहा था.
लंड का सुपारा घुसवाते ही उसे हल्का दर्द हुआ, मैंने घी टपकाते हुए गांड की चिकनाई बढ़ा दी. इसी तरह से धीरे धीरे करके मैंने पूरा लंड बहन की गांड में ठांस दिया और रुक कर उसके मम्मों को मसलने लगा. उसकी चुत के दाने को रगड़ने लगा. उसका दर्द जाता रहा और वो गांड मराने के लिए खुल गई.
अब मैं धीरे धीरे अन्दर बाहर कर रहा था और एक हाथ से उसकी चूत भी सहला रहा था, जिससे उसका मज़ा दुगुना हो गया.
करीब दस मिनट बाद पूरा लंड अन्दर बाहर होने लगा था. मेरी बहन भी मस्ती से अपने भाई से गांड मरवा रही थी.
फिर एक जानदार चुदाई का अंत होने वाला था. मैंने अपने हाथ और लंड दोनों की स्पीड बढ़ा दी … और हम दोनों एक साथ झड़ गए. मैं उसकी गांड में और वो मेरे हाथ में.
उसके बाद उसकी सफाई करके उसके ऊपर लेट गया. मैंने घड़ी में टाइम देखा तो पांच बज रहे थे.
वो सो गई थी. मैंने उसको जगा कर जाने का बोला तो वो बोली- कल भी आओगे न?
मैंने उसको हां बोला और वापस अपने घर आ गया.
उसके बाद मैंने उसके साथ इन तीन महीनों में न जाने कितनी बार चुदाई की है, वो भी पूरे जोश के साथ मेरा इन्तजार करती है.
वैसे तो मैं मारवाड़ी जरूर हूँ, तो मुझे पता है कि मारवाड़ी बिस्तर में कैसे होते हैं.
ये मेरी पहली सेक्स कहानी है, बाद की कुछ याद भरी चुदाई की कहानियों के साथ मैं फिर मिलूंगा. मैं आपका जय आपसे जानना चाहता हूँ कि आपको मेरी बहन की चुत चुदाई की कहानी कैसी लगी. प्लीज़ कमेंट्स करके जरूर बताइएगा.

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